Wednesday, October 5, 2011

अब राह भटकना कैसा ..........

समाज और ज्ञान के चक्कर में,
मै भी औरो की तरह भटक रहा था l 
भटकते हुवे राह मै मुझे गुरु मिल गए
और उन्होंने मेरे हाथ में सत्य साधना का दीपक दे दिया
और कहा की इसे अब अपने पास रख l 
और अब सत्य साधना के दीपक के प्रकाश से मुझे
सही अपनी मंजिल की राह मिल गई............
अब राह भटकना  कैसा ............

Sunday, October 2, 2011

अपने ही हाथो से अपने पैरो पर

जो शिष्य गुरु के बताये मार्ग पर नहीं चलता है,
वह अपने ही हाथो से अपने पैरो पर कुल्हाड़ी मरता है l 

गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान

जिसने गुरु द्वारा दिया गया ज्ञान,
जीवन में उतार लिया,
वहा मुक्ति की राह पर चल दिया l 

गुरु के बिना ज्ञान

सागर को सुखाया नहीं जा सकता
हिमालय को हिलाया नहीं जा सकता
वैसे ही गुरु के बिना ज्ञान पाया नही जा सकता .....

धन दोलत का साथ

धन दोलत का साथ हो तो उपवन मिल जायेगा
लेकिन सार्थक जीवन तो गुरु से ही मिलेगा 

विशाल कल्पवृक्ष

गुरु ज्ञान का वह बीज होता है
जिसे शिष्य एक विशाल
कल्पवृक्ष का रूप देता है .....

दुःख से सुख की और

गुरु शिष्य को दुःख से सुख की और
जाने का मार्ग प्रशस्त करते है .........